Highlights
- सैक्सोनी-अनहॉल्ट में AfD की 43.8% वोट वाली जीत ने जर्मनी की राजनीति हिला दी है।
- AfD को सत्ता से दूर रखने वाला ‘फायरवॉल’ अब टूटने के कगार पर पहुंच गया है।
- AfD सत्ता में आई तो यूरोप में दक्षिणपंथी राजनीति के और मजबूत होने की संभावना बढ़ेगी।
बर्लिन: जर्मनी की राजनीति में दक्षिणपंथी पार्टी ऑल्टरनेटिव फॉर जर्मनी यानी कि AfD ने एक बड़ी राजनीतिक कामयाबी हासिल की है। पूर्वी जर्मनी के सैक्सोनी-अनहॉल्ट राज्य में रविवार को हुए चुनाव में AfD को 43.8% वोट मिले। यह 5 साल पहले के मुकाबले दोगुने से भी ज्यादा है। यह जीत इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि जर्मनी की मुख्यधारा की पार्टियां लंबे समय से AfD के साथ किसी भी तरह का राजनीतिक गठजोड़ करने से इनकार करती रही हैं। इसी नीति को जर्मनी में ‘फायरवॉल’ कहा जाता है। अब सवाल यह है कि क्या AfD की इस बड़ी जीत के बाद यह राजनीतिक फायरवॉल टूट सकता है?
जर्मनी की सियासत में ‘फायरवॉल’ क्या है?
जर्मनी की प्रमुख पार्टियों ने एक तरह की राजनीतिक सीमा बना रखी है कि वे AfD के साथ सरकार बनाने या सत्ता में आने में उसकी मदद नहीं करेंगी। इसका एक बड़ा कारण जर्मनी का नाजी अतीत है। एडोल्फ हिटलर के नाजी शासन और उसके दौरान हुए अत्याचारों के बाद जर्मनी में राष्ट्रवाद, नस्लीय श्रेष्ठता और कट्टर दक्षिणपंथ को लेकर बेहद संवेदनशीलता रही है। जर्मनी की घरेलू खुफिया एजेंसी ने देश के कुछ हिस्सों में AfD को चरमपंथी संगठन के रूप में वर्गीकृत किया है। इनमें सैक्सोनी-अनहॉल्ट भी शामिल है। इसी वजह से मुख्यधारा की पार्टियां AfD से दूरी बनाए रखने को लोकतांत्रिक व्यवस्था और देश के इतिहास से जुड़ा जरूरी कदम मानती हैं।
मात्र 13 साल में AfD इतनी मजबूत कैसे हो गई?
AfD की स्थापना करीब 13 साल पहले हुई थी। इतने कम समय में पार्टी जर्मनी की एक बड़ी राजनीतिक ताकत बन गई है। हालांकि अब तक वह किसी राज्य या केंद्र की सरकार का हिस्सा नहीं रही है। AfD का मुख्य जोर अप्रवासियों के विरोध, सख्त इमिग्रेशन नीति और रूस के प्रति अपेक्षाकृत नरम रुख पर है। जर्मनी ही नहीं, यूरोप के कई देशों में दक्षिणपंथी और राष्ट्रवादी दलों को बढ़ता समर्थन मिल रहा है। जर्मनी भी इससे अछूता नहीं रहा।

कई जर्मनों को लंबे समय तक लगता रहा कि नाजी अतीत का सामना करने, शिक्षा देने और भेदभाव के खिलाफ कड़े कानून बनाने के कारण उनका देश राष्ट्रवाद और नस्लीय श्रेष्ठता की राजनीति से काफी हद तक सुरक्षित हो चुका है। लेकिन हाल के चुनावों ने इस धारणा को चुनौती दी है।
इस बार AfD को इतने वोट क्यों मिले?
AfD की बढ़ती लोकप्रियता के पीछे कई वजहें हैं।
- इमिग्रेशन का मुद्दा: AfD लंबे समय से प्रवासियों और शरणार्थियों की संख्या कम करने की मांग करती रही है। ऐसे मतदाता जो देश में बढ़ते इमिग्रेशन को आर्थिक और सामाजिक दबाव से जोड़ते हैं, वे AfD की तरफ जा रहे हैं।
- अर्थव्यवस्था को लेकर नाराजगी: जर्मनी की अर्थव्यवस्था लंबे समय से धीमी गति से बढ़ रही है। महंगाई, आर्थिक दबाव और रोजगार तथा सामाजिक सुरक्षा को लेकर चिंता ने सरकार के प्रति नाराजगी बढ़ाई है।
- मुख्यधारा की सरकार से असंतोष: चांसलर फ्रेडरिक मर्ज की सेंटर-राइट CDU और सेंटर-लेफ्ट सोशल डेमोक्रेट्स की गठबंधन सरकार लगातार अंदरूनी खींचतान के लिए आलोचना झेल रही है। सरकार आर्थिक सुधारों को आगे बढ़ाना चाहती है, जिनमें पेंशन व्यवस्था में बदलाव जैसे कठिन फैसले शामिल हैं। लेकिन इन सुधारों को लेकर मतदाताओं में नाराजगी है।
- रूस और यूक्रेन को लेकर अलग राय: AfD रूस के प्रति अपेक्षाकृत नरम रुख रखती है और यूक्रेन को लेकर जर्मनी की मौजूदा नीति की आलोचना करती है। वहीं मर्ज सरकार यूक्रेन की बड़ी समर्थक है और रूस के खिलाफ कड़ा रुख रखती है। इन मुद्दों पर असंतुष्ट मतदाताओं को AfD एक विकल्प दिखाई दे रही है।
क्या AfD अब सरकार बना सकती है?
इस चुनाव के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उभरकर सामने आया है कि क्या AfD सरकार बनाने की हालत में है। सैक्सोनी-अनहॉल्ट में AfD को 43.8% वोट मिले। यह बहुमत से कुछ ही कम है। AfD के राज्य विधानसभा में बहुमत के लिए सिर्फ 3 सीटों की कमी है। पार्टी के गवर्नर पद के उम्मीदवार उलरिश जीगमुंड ने कहा है कि AfD के पास सरकार बनाने का स्पष्ट जनादेश है। उन्होंने दूसरे दलों और यहां तक कि व्यक्तिगत विधायकों से भी बातचीत करने की बात कही है।

जीगमुंड ने कहा कि पार्टी का लक्ष्य आने वाले दिनों और हफ्तों में एक स्थिर बहुमत तैयार करना है। हालांकि उन्होंने अल्पमत सरकार बनाने से इनकार किया है और यह भी कहा है कि AfD उन पार्टियों जैसी नहीं बनना चाहती जिन्हें अपने चुनावी वादों से पीछे हटने के कारण जनता ने खारिज किया।
BSW बन सकता है ‘किंगमेकर’
AfD को सरकार बनाने में सबसे अहम मदद वामपंथी पार्टी BSW से मिल सकती है। उसे चुनाव में 5.3% वोट और 5 सीटें मिली हैं। दिलचस्प बात यह है कि विचारधारा के लिहाज से AfD और BSW अलग हैं, लेकिन दोनों कुछ अहम मुद्दों पर समान रुख रखते हैं। दोनों इमिग्रेशन का विरोध करते हैं और रूस के प्रति अपेक्षाकृत नरम रुख रखते हैं। BSW के प्रमुख उम्मीदवार थॉमस शुल्जे ने सोमवार को संकेत दिया कि उनकी पार्टी AfD उम्मीदवार को गवर्नर बनने में मदद करने के लिए तैयार हो सकती है।
BSW ने AfD के खिलाफ बने ‘फायरवॉल’ की आलोचना भी की है। पार्टी संभावित तीसरे दौर के गवर्नर चुनाव में मतदान से दूर रहकर जीगमुंड के लिए रास्ता खोल सकती है, क्योंकि उस दौर में साधारण बहुमत पर्याप्त होगा। राजनीतिक विश्लेषक वोल्कर रेजिंग के मुताबिक, BSW अब सैक्सोनी-अनहॉल्ट के भविष्य को तय करने में निर्णायक भूमिका निभा सकती है। उन्होंने कहा कि यह अभी साफ नहीं है कि रूस को लेकर दोनों दलों की समान सोच के आधार पर वे फायरवॉल को पार करने के लिए साथ आएंगे या नहीं।
AfD को रोकना इतना मुश्किल क्यों है?
AfD को सरकार से बाहर रखने के लिए विधानसभा में मौजूद बाकी सभी पार्टियों जैसे कि CDU, सोशल डेमोक्रेट्स, ग्रीन्स, लेफ्ट पार्टी और BSW को एक साथ आना होगा। 5 दलों का ऐसा गठबंधन बेहद असामान्य होगा। इसमें वैचारिक मतभेद बहुत ज्यादा हैं और सरकार के अस्थिर होने का खतरा भी रहेगा। एक और संभावना है कि दूसरी पार्टियों के कुछ नए चुने गए विधायक AfD में चले जाएं। AfD को बहुमत तक पहुंचने के लिए सिर्फ 3 विधायकों की जरूरत है। यही वजह है कि AfD की जीत ने जर्मनी की दशकों पुरानी ‘फायरवॉल’ नीति के सामने सबसे बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।
AfD की जीत पर चांसलर मर्ज ने क्या कहा?
चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने AfD की जीत के बाद भी उसके साथ किसी तरह के सहयोग से इनकार किया है। उन्होंने अपनी पार्टी CDU की हार को पिछले कई वर्षों, बल्कि दशकों की सबसे गंभीर चुनावी हार बताया। हालांकि उन्होंने साफ किया कि वह पद छोड़ने या पीछे हटने वाले नहीं हैं। मर्ज ने कहा,
'हार मान लेना मेरे लिए कोई विकल्प नहीं है।'
मर्ज ने सहयोगी देशों को भरोसा दिलाते हुए कहा कि जर्मनी की संस्थाएं मजबूत और स्थिर हैं और देश अपने मूल्यों तथा संविधान पर कायम रहेगा। रूस के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि वह अपनी इस मूल सोच से 'एक मिलीमीटर भी पीछे नहीं हटेंगे' कि जर्मनी को रूस के खिलाफ अपनी आजादी की रक्षा करनी होगी। जर्मनी यूक्रेन के युद्ध में उसके सबसे बड़े समर्थकों में शामिल है।
फिर भी चांसलर मर्ज की मुश्किलें बढ़ेंगी?
AfD को कमजोर करने का वादा करके सत्ता में आए मर्ज के सामने अब उलटा संकट खड़ा हो गया है। उनके सत्ता में आने के बाद AfD का समर्थन कम होने के बजाय बढ़ा है। मर्ज की सरकार की लोकप्रियता लगातार कम हुई है। सरकार की गठबंधन सहयोगी पार्टियों के बीच खींचतान और देश की धीमी अर्थव्यवस्था ने भी लोगों की नाराजगी बढ़ाई है। मर्ज अब भी आर्थिक सुधारों पर आगे बढ़ने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि जर्मनी को बुनियादी सुधारों की जरूरत है और यह देश तथा आने वाली पीढ़ियों के भविष्य का सवाल है।

मर्ज ने कहा कि सुधारों को आगे बढ़ाने का उनका संकल्प 'अटूट' है। हालांकि उन्होंने माना कि सरकार को इन सुधारों को सिर्फ तर्क के आधार पर नहीं, बल्कि भावनात्मक रूप से भी लोगों को समझाना होगा। जर्मनी में 20 सितंबर को दो और राज्यों बर्लिन और पूर्वी राज्य मेक्लेनबर्ग-वोर्पोमेर्न में चुनाव होने हैं। यहां भी AfD मजबूत स्थिति में है।
अब जर्मनी की राजनीति में क्या बदलेगा?
जर्मनी की सियासत में अब सबसे बड़ा बदलाव यह हो सकता है कि AfD पहली बार किसी राज्य सरकार का नेतृत्व करने की स्थिति में आ जाए। अगर AfD सैक्सोनी-अनहॉल्ट में सरकार बनाने में सफल रहती है तो जर्मनी में द्वितीय विश्व युद्ध के बाद पहली बार एक धुर-दक्षिणपंथी पार्टी राज्य सरकार का नेतृत्व करेगी। इससे दूसरी पार्टियों पर भी दबाव बढ़ सकता है कि वे AfD के साथ सहयोग को लेकर अपनी पुरानी नीति पर दोबारा विचार करें।

AfD पहले ही पिछले साल के राष्ट्रीय चुनाव में द्वितीय विश्व युद्ध के बाद किसी धुर-दक्षिणपंथी पार्टी का सबसे अच्छा प्रदर्शन कर चुकी है। वह संसद में सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी बन गई है। मर्ज की CDU ने AfD के साथ गठबंधन से इनकार करते हुए सेंटर-लेफ्ट सोशल डेमोक्रेट्स के साथ सरकार बनाई। लेकिन अब राज्य स्तर पर AfD की ताकत बढ़ने से यह रणनीति और मुश्किल हो सकती है।
AfD की जीत से यूरोप पर क्या असर पड़ेगा?
AfD की जीत का असर सिर्फ जर्मनी तक सीमित नहीं रहेगा। जर्मनी यूरोप की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था और यूरोपीय संघ की सबसे प्रभावशाली शक्तियों में से एक है। AfD की सफलता यूरोप के दूसरे दक्षिणपंथी और राष्ट्रवादी दलों को भी हौसला दे सकती है। चुनावी जीत के बाद यूरोप के कई दक्षिणपंथी नेताओं ने AfD को बधाई दी। अरबपति एलन मस्क ने भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर AfD को जीत की बधाई देते हुए 'बहुत बढ़िया' कहा। जीगमुंड ने इसके लिए उनका धन्यवाद किया।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर चुनाव के अनुमान का स्क्रीनशॉट साझा किया, हालांकि उन्होंने कोई टिप्पणी नहीं की। रूस के राष्ट्रपति के विशेष दूत किरिल दिमित्रिएव ने इसे AfD की 'ऐतिहासिक जीत' बताया। स्पेन और पुर्तगाल की दक्षिणपंथी पार्टियों ने भी AfD को बधाई दी। लेकिन पोलैंड और फ्रांस ने AfD की आलोचना की है।
जर्मनी में लोगों की प्रतिक्रिया क्या है?
AfD को वोट नहीं देने वाले कई मतदाताओं में नतीजे को लेकर गहरी निराशा है। मैगडेबर्ग के 86 वर्षीय हॉर्स्ट वाल्टर बोर्नर, जिनका जन्म द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान हुआ था, ने चुनाव परिणाम पर हैरानी जताई। उन्होंने कहा कि यह उनके लिए 'भयानक' है और चुनाव डर के माहौल में हुआ। उन्होंने माना कि चुनाव प्रचार के दौरान AfD की रैलियों में उमड़ी भीड़ को देखकर जीत की संभावना का अंदाजा लगाया जा सकता था, लेकिन उनके मुताबिक 'ऐसा कभी नहीं होना चाहिए था।'
अब होगी ‘फायरवॉल’ की सबसे बड़ी परीक्षा
सैक्सोनी-अनहॉल्ट में AfD की 43.8% वोट वाली जीत सिर्फ एक राज्य का चुनावी नतीजा नहीं है। यह जर्मनी की उस राजनीतिक व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती है, जिसने अब तक AfD को सत्ता से दूर रखा है। अगर AfD सरकार बनाने में सफल होती है तो यह जर्मनी की राजनीति में एक बड़ा मोड़ होगा। इसका असर इमिग्रेशन, रूस-यूक्रेन युद्ध, यूरोपीय संघ की नीतियों और पूरे यूरोप में दक्षिणपंथी राजनीति के भविष्य पर पड़ सकता है। यह जर्मनी के राजनीतिक ‘फायरवॉल’ की सबसे बड़ी परीक्षा बन चुका है।
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